आज से रेलवे के 3.78 लाख कर्मचारियों को मिलेगा जियो का नेटवर्क, फोन के बिल में 35% की कमी आएगी

देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो मंगलवार से भारतीय रेलवे को अपनी सर्विस देने लगेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रिलायंस जियो की मदद से रेलवे कर्मचारियों के फोन कनेक्शन बिल में 35% तक की कमी आने की उम्मीद है। रेलवे के अधिकारी-कर्मचारियों के फोन कनेक्शन का बिल भारतीय रेलवे ही चुकाता है।

6 साल से एयरटेल दे रहा था सर्विस
दरअसल, रेलवे के अधिकारी और कर्मचारियों को क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) के तहत मोबाइल कनेक्शन दिए जाते हैं। रेलवे के मुताबिक, पिछले 6 साल से भारती एयरटेल रेलवे को सर्विस दे रहा था, जिसके लिए रेलवे हर साल 100 करोड़ रुपए का बिल जमा करता था, लेकिन इसकी वैलिडिटी 31 दिसंबर 2018 को खत्म हो चुकी है। इसलिए अब इसका टेंडर रिलायंस जियो इन्फोकॉम को दिया गया है।

3.78 लाख कर्मचारियों को मिलेगी जियो की सर्विस
भारती एयरटेल रेलवे के करीब 1.95 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी सर्विस देता था, लेकिन रिलायंस जियो 3.78 लाख कर्मचारियों को सर्विस देगा। इस हिसाब से एयरटेल के मुकाबले जियो 1.83 लाख ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों को अपनी सर्विसेस देगा।

कर्मचारियों को मिलेगा डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग
रेलवे के कर्मचारियों को जियो की तरफ से हाई-स्पीड इंटरनेट डेटा और अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के अलावा एसएमएस की सुविधा भी मिलेगी। जियो के प्लान के मुताबिक, रेलवे के कर्मचारी डेली डेटा खत्म होने के बाद सिर्फ 10 रुपए में 2 जीबी एक्स्ट्रा डेटा भी ले सकेंगे।

जियो की तरफ से मिलेंगे चार प्लान
रेलवे के अधिकारी-कर्मचारियों को रिलायंस जियो चार तरह के प्लान देगा। इस प्लान में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी को 60 जीबी डेटा मिलेगा, जिनकी संख्या सिर्फ 2% है। वहीं ज्वॉइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों (26%) को 45 जीबी डेटा मिलेगा जबकि ग्रुप-सी के स्टाफ (72%) को 30 जीबी डेटा मिलेगा। इसके अलावा एक 49 रुपए का एसएमएस प्लान भी रेलवे वालों को मिलेगा।

दो सिक्योरिटी रिसर्चर ने एक मोम के हाथ का इस्तेमाल कर दावा किया कि, इसके जरिए स्कैनिंग सिस्टम को धोखा दिया जा सकता है। जेन क्रिस्लर और जूलियन अल्ब्रेच्ट नाम के सिक्योरिटी रिसर्चर ने दावा किया है कि सिक्योरिटी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्कैनिंग मशीन, जिसके जरिए लोगों के हाथ को स्कैन कर उनकी पहचान की जाती है, उसे मोम के हाथ की मदद से धोखा दिया जा सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि, स्कैनिंग मशीन पूरी तरह से समझदार नहीं होतीं। उन्होंने इसी महीने जर्मनी में हुई एक कॉन्फ्रेंस में इस बात का खुलासा किया है।

फोटो के जरिए दूसरे व्यक्ति के हाथ को कॉपी किया
क्रिस्लर और अल्ब्रेच्ट ने बताया, उन्होंने एसएलआर कैमरे की मदद से किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ की फोटो खींचीं और इसके बाद उस व्यक्ति के हाथ के पैटर्न को कॉपी किया।

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